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श्रीमती कमलादेवी रामचन्द्र जी वैष्णव, कराड़ी-मुंबई

समाज रत्न भामाशाह के नाम से नवाजे श्री रामचन्द्र जी वैष्णव को आज वैष्णव समाज का कौनसा व्यक्ति नहीं जानता, राजस्थान के पाली जिले के गांव कराड़ी के श्री रामचन्द्र जी वैष्णव का जन्म 17.11.1960 को गांव कराड़ी में हुआ । आपकी माता का नाम श्रीमती घीसी बाई एवं पिता का नाम श्री जेठुदास जी वैष्णव है । आपकी माता जी का स्वर्गवास बचपन में ही हो गया था एवं पिता जी का भी स्वर्गवास हो चुका है । आपने अपनी मेट्रीक तक की शिक्षा वैष्णव समाज के छात्रावास, फालना में रह कर की ।

श्री रामचन्द्र वैष्णव की शादी श्रीमती कमला देवी के साथ सुमेरपुर के पास स्थित जाकोड़ा गांव में हुई । आपके दो पुत्रियां एवं एक पुत्र है बड़ी पुत्री की शादी श्री नवीन कुमार चन्दुलाल जी वैष्णव भाडुंप के यहां हुई तथा छोटी पुत्री ने लंदन से एम.बी.ए. किया है एवं वर्तमान में मुम्बई में अपना खुद का व्यापार कर रही है एवं बेटे ने भी लन्दन से आई.टी. पूर्ण कर ली है ।

श्री रामचन्द्र जी वैष्णव जो एक साधारण परिवार में जन्मे तथा बड़े हुए उनके पिता जी भायन्दर, मुम्बई में बर्तन का व्यवसाय करते थे तथा उनके मार्गदर्शन व संस्कार से श्री रामचन्द्र जी ने राजस्थान में शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात् मुम्बई में होजरी की होलसेल दुकान में सर्विस की, बाद में भायन्दर में अपना स्वयं का किराणा का व्यापार शुरू किया एवं साथ ही साथ भवन निर्माण के क्षैत्र में रूची रखते हुए कई भवनों का निर्माण किया और कालान्तर में भायन्दर में एक प्रतिष्ठित भवन निर्माता के रूप में अपनी पहचान कायम की । वर्तमान में वे जीवन आशा डवलपर्स कम्पनी के नाम से अपना भवन निर्माण का व्यवसाय कर रहे है राजनैतिक क्षैत्र में भी आपकी पहचान भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में भायन्दर में बनी हुई है तथा अपने इस जनप्रतिनिधित्व के रूप में आप आम जन की जिस रूप में सेवा कर रहे है उससे उस क्षैत्र में आपकी लोकप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ रही है तथा आने वाले समय में आप को मेयर या एम.एल.ए. के टिकट मिलने की भी पूरी संभावना है ।

श्री रामचन्द्र जी ने वैष्णव समाज के उत्थान व कल्याण को ही अपने जीवन का लक्ष्य बना रखा है तथा समाज के विकास को अपना कर्तव्य समझ कर आपने हर पल वैष्णव समाज के लिए निःस्वार्थ भाव से तन, मन एवं धन से सेवा की है और कर रहे है, आपने शिक्षा को महत्व देने के लिए अपने जन्म स्थल कराड़ी गांव में स्कूल का निर्माण अपने माता-पिता के नाम पर करवाकर गांव को सुपुर्द किया। आप गांव में गौषाला एवं अन्य परोपकारी कार्याे हेतु समय-समय पर आर्थिक सहयोग करते रहते है ।

मृदुभाषी व सरल स्वभाव के धनी श्री रामचन्द्र जी वैष्णव में नाम व पद का कोई मोह नहीं है वे केवल समाज में विकास चाहते है इसलिए उन्होंने भायन्दर मुम्बई में आपने माता-पिता के नाम पर समाज भवन हेतु जमीन देकर कर उस पर एक मंजिल का निर्माण करवा, जो समाज भवन आज वैष्णव समाज के प्रेम, भाईचारा व संगठन का प्रतीक है । वैष्णव समाज की महाराष्ट्र में ज्योर्तिलिंग यात्रा व चारधाम यात्रा में भी आपने तन, मन धन से श्री जयन्ति भाई बी. वैष्णव को सहयोग प्रदान किया ।

श्री रामचन्द्र जी वैष्णव ने श्री जयन्ति भाई बी. वैष्णव के साथ मिल कर समाज विकास की धारा में अखिल भारतीय वैष्णव (चतुः सम्प्रदाय) विकास परिषद एवं विकास ट्रस्ट का गठन किया जिसका प्रथम महासम्मेलन पुष्करराज में दिनांक 3, 4 एवं 5 मई 2008 को सफलता पूर्वक आयोजित किया। आप अखिल भारतीय वैष्णव (चतुः सम्प्रदाय) विकास ट्रस्ट के वर्तमान में अध्यक्ष है। पुष्कर में बनी वैष्णव समाज की अनौखी एवं ऐतिहासिक धर्मशाला के निर्माण कमेटी के आप चेयरमेन भी है ।

श्री रामचन्द्र जी वैष्णव का वैष्णव समाज के सुमेरपुर, राजस्थान में छात्रावास निर्माण में भी विषेष योगदान रहा इतना ही नहीं पुष्कर राज में बनी वैष्णव समाज की धर्मशाला के संस्थापक ट्रस्टी बनने हेतु आपने 11,00,000/- रूपये दिये और जब पुष्कर धर्मशाला के निर्माण में समाज को धन की और आवश्यकता पड़ी तब आपने धर्मशाला हेतु 65,00,000/- रूपये देकर धर्मषाला के निर्माण को पूर्ण करने में अवस्मरणीय योगदान दिया और अखिल भारतीय वैष्णव (चतुः सम्प्रदाय) विकास परिषद एवं ट्रस्ट के तत्वावधान में अखिल भारतीय वैष्णव (चतुः सम्प्रदाय) भवन एवं शैक्षणिक ट्रस्ट के संरक्षक होने के नाते आपका दिनांक 13, 14 एवं 15 मई 2011 को वैष्णव धर्मशाला पुष्कर के उद्घाटन में विशेष भूमिका रही, जहां हजारों की तादाद में वैष्णव बन्धु उपस्थित होकर इस अनुठी, मनमोहक एवं विशालतम धर्मशाला के निर्माण के लिए आपके साथ-साथ श्री जयन्ति भाई एवं अन्य अनुदानदाताओं का आभार व्यक्त किया ।

श्री रामचन्द्र जी की समाज के विकास के प्रति जो लगन है वो यहां पर आकर नहीं थमी उन्होंने श्री जयन्ति भाई बी. वैष्णव के साथ मिल कर वैष्णव समाज के लिए हरिद्वार में बनी बनाई धर्मशाला खरीदने का सौदा कर वैष्णव समाज की एक बहुत बड़ी जरूरत को पुरा किया है आज इस धर्मशाला के खरीदे जाने के समाचार सम्पूर्ण वैष्णव समाज में हर्ष की लहर फैल गई है तथा इस हेतु सहयोग करने के लिए वैष्णव समाज के लोग अग्रसर हो रहे है । समाज रत्न भामाशाहा श्री रामचन्द्र जी वैष्णव के आज तक के सफर में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कमलादेवी ने उनका साथ सीता जी की भांति दिया है । सम्पूर्ण वैष्णव समाज को इस बात का गर्व है कि श्री रामचन्द्र जी जैसे पुरूष ने वैष्णव समाज में जन्म लेकर खुद के माता-पिता के साथ-साथ वैष्णव समाज के नाम को स्वर्णीम अक्षरों में लिखा है । ।

श्रीमती कमलादेवी एवं समाज रत्न भामाशाहा श्री रामचन्द्र जी वैष्णव ने वैष्णव वेबसाईट के संरक्षक बनकर वैष्णव वेबसाईट के संचालन में जो सहयोग किया उसके लिए वैष्णव वेबसाईट परिवार आपका धन्यवाद ज्ञापित करते है ।

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