Dominant and Prominant Figure in Samaj

Poet

परिचय

          वैष्णव समाज का नाम रोषन करने वाले श्री बालकवि बैरागी का जन्म दिनांक 10 फरवरी 1931 को गांव रामपुरा तहसील मनासा जिला नीमच (मध्य प्रदेष) में श्री द्वारिकादास बैरागी एवं श्रीमती धापूबाई बैरागी के घर हुआ। वे जन्म से ही सहज, कुषल एवं प्रेम भाव वाले व्यक्ति रहे है। उन्होेंने सन् 1964 में विक्रम विष्वविद्यालय उज्जैन से एम.ए. (हिन्दी) प्रथम श्रेणी से की एवं एक लोकप्रिय कवि तथा साहित्यकार के रूप में अपनी पहचान बनाई । आपका विवाह श्रीमती सुषीला चन्द्रिका बैरागी से हुआ जिनका दिनांक 18.07.2011 को स्वर्गवास हो गया, आपके दो पुत्र है। बड़ा पुत्र श्री सुषीलनंदन बैरागी (मुन्ना बैरागी) है, पुत्रवधु श्रीमती कृष्णा (सोना) बैरागी, पौत्री डाॅ रौनक बैरागी एवं पौत्र श्री नमन बैरागी है। आपके छोटे पुत्र श्री सुषीलवंदन बैरागी (गोर्की बैरागी) है, पुत्रवुध श्रीमती नीरजा (रूपा) बैरागी, पौत्रियां कु. अभिसार बैरागी, कु. अनमोल बैरागी है । श्री बैरागी के पुत्री नहीं है परन्तु आप अपनी बहँुओं को ही अपनी बेटियां मानते है । 


       श्री बालकवि बैरागी का जन्म का नाम नंदराम दास बैरागी है। आपकी कविताएं एवं रचनाएं सम्पूर्ण भारत में लोकप्रिय है और देश के कई राज्यों में आपकी कविताएं एवं रचनाएं पाठयक्रमों में पढ़ाऐ जा रहे है, इतना ही नहीं आप पर तीन पी.एच.डी. विभिन्न विश्वविद्यालयों में हो चुकी है एवं वर्तमान में आंध्र विश्वविद्यालय विषाखापटट्नम एवं अम्बेडकर विष्वविद्यालय आगरा पी.एच.डी. हो रही है और तीन विद्यार्थी ने श्री बैरागी पर लघु निबंध लिखकर एम.ए. कर चुके हैं । 


       श्री बालकवि बैरागी ने मालवी भाषा में कई कविताएं लिखी जिनमें प्रमुख संग्रह है चटक म्हारा चम्पा एवं अई जावो मैदान में, आपके कई कहानी संग्रह भी प्रकाषित हुऐ जिनमें से मनुहार भाभी तथा बिजूका बाबू मनुहार भाभी कहानी संग्रह की चार कहानियों पर े दूरदर्षन (भोपाल) फिल्में बना चुका है तथा बिजूका बाबू भी आपकी बहुत लोकप्रिय कहानी संग्रह रही है । श्री बैरागी ने दरद दिवानी, जूझ रहा है हिन्दुस्तार, दादी का कर्ज, दो टूक, आगगो बच्चो, गाओं बच्चो, कोई तो समझे, रेत के रिष्ते, ललकार, मैं उपस्थित हूँ यहां, आलोक का अट्टाहस, ओ अमलतास, गीत बहार, गीत लहर, गौ व गली, शीलवती आग, सिन्डेªला (काव्यानुवाद), गुलिव्हार (काव्यानुवाद), मन नही मन, वंषज का वक्तव्य, भावी रक्षक देष के इत्यादि 2 दजर्न से भी अधिक पुस्तकें लिख दी है और कई उपन्यास भी लिखे है । 


      श्री बालकवि बैरागी की कविताएं एवं रचनाएं देश के सभी हिन्दी अखबारों में प्रकाषित होती रही है उन्होनें दूरदर्षन, आकाषवाणी एवं अन्य टी.वी. चेनलोें में अपनी प्रस्तुति दी है, श्री बैरागी ने फिल्मी जगत में भी अपनी अनौखी पहचान बनाई है उन्होंने छोटी बड़ी करीबन 26 फिल्मी के लिए गीत लिखे जिनमें से रेषमा और शेरा के गीत बहुत लोकप्रिय है उन्होेंने देष के सभी बड़े कवि सम्मेलन में आमन्त्रित किया जा रहा है । 


      श्री बालकवि बैरागी कवि, साहित्यकार के साथ-साथ बहुत बड़े देषभक्त भी है उन्होंने सन् 1945 से ही कांगे्रस अपनाया तथा कभी दल नहीं, पारिवारिक संघर्षो और गरीबी का जीवन जीते हुए स्वतन्त्रता संग्राम का सिपाही नहीं बन सके इसका श्री बैरागी जी को मलाल आज तक है, वे जिला कांगे्रस मंदसौर के कार्यालय मंत्री और महामन्त्री रहे एवं बाद में मनासा कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे श्री बालकवि बैरागी का राजनैतिक सफल यहां तक ही नहीं रहा बल्कि देष की सबसे कुषल प्रधानमन्त्री श्रीमती इंदिरा गांधी और पं. द्वारिका प्रसाद मिश्र ने वर्ष 1967 में श्री बैरागी को मनासा विधानसीाा सीट से कांगे्रस का उम्मीदवार बनाया और दस वर्ष से मनासा के विधायक रहे जनसंघ के श्री सुंदरलाल पटवा को हरा कर मनासा के विधायक बने । और पं. श्री द्वारिका प्रसाद मिश्र के संसदीय सचिव बनने पर श्री बैरागी को जी.ए.डी. सामान्य प्रषासन विभाग से जोड़ा गया और सन् 1969 से 1972 तक पं. श्री श्यामाचरण शुल्क के मंत्री मंडल में सूचना प्रकाषन, भाषा, पर्यटन और जी.ए.डी. के राज्यमंत्री रहे । 1980 में मनासा से फिर चुनाव लड़ा और विधायक बने तथा तत्कालीन अर्जुनसिंह के मंत्रीमण्डल में खाद्यमन्त्री (स्वतन्त्र प्रभार) राज्यमंत्री रहे एवं 1984 तक लोकसभा में रहे ।


      श्री बालकवि बैरागी सन् 1995 से 1996 तक अखिल भारतीय कांग्रेस के संयुक्त सचिव रहे । सन् 1998 में सोनिया गांधी ने मध्यप्रदेष से राज्यभा में उन्हें बैठाया जो सन् 2004 की 29 जून को राज्यसभा से निवृत हुए । श्रीमती सोनिया गांधी ने श्री बैरागी को 2004 में राजस्थान प्रदेष के आंतरिक संगठनात्मक चुनावों को चुनाव प्राधिकरण अध्यक्ष बनाया । श्री बालकवि बैरागी म.प्र. कांग्रेस चुनाव समिति के अध्यक्ष भी रहे, 2008-11 तक म.प्र. कांग्रेस के उपाध्यक्ष रहे । 


      श्री बालकवि बैरागी ने देष को कई नारे दिये जिसमें से प्रमुख नारा था हम दो हमारे दो । श्री बालकवि बैरागी ने अमेरिका, इंग्लैड, मारीषक, श्रीलंका, नेपाल, कम्बोडिया, हांगकांग, नीदरलैड, सूरीनाम, म्यांमार, सेषल्स, जर्मनी इत्यादि विदेष की यात्राएं भी की है । श्री बैरागी मानव संसाधन विकास मंत्रालय- सूचना प्रसारण मंत्रालय एवं साचर मंत्रालय की स्थायी समितियों के सदस्य भी रहे । अभी केन्द्रीय हिन्दी समिति के सदस्य है, पोत परिवहन मंत्रालय एवं कार्मिक मंत्रालय की हिन्दी सलाहकार समिति के सदस्य रहे, दलहन विकास परिषद के अध्यक्ष भी रह चुके है । 


      श्री बैरागी कहते है कि मैं कलम से कमाता हूँ, कांगेे्रस को गाता हूँ खाता नहीं, मेरे पास कोई व्यापार, व्यवसाय, धंधा या कारखाना, फेक्ट्री, होटल, पेट्रोल पम्प नहीं है । अपने अतीत से मुझे कोई षिकायत नहीं है अपने वर्तमान में श्री बैरागी बहुत सन्तुष्ट सुखी है ही पार्टी के लिए सक्रिय रहना इनका जीवन क्रम है । स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी, स्व. श्री लालबहादुर शास्त्री और स्व. श्री राजीव गांधी का स्नेह प्यार मेरी सम्पति है । श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी के प्रति वे सदैव समर्पित और निष्ठकावान रहे । श्री बैरागी कहते है कि पद आते जाते रहते है मैं यह समर्पित निष्ठा किसी मूल्य पर नहीं छोडंूगा। 


      श्री बैरागी के सूत्र वाक्य - ‘‘ साहित्य मेरा धर्म, राजनीति मेरा कर्म, अपने धर्म और कर्म की शुचिता का मुझे पूरा ध्यान है बाएं हाथ से लिखता हूँ ईष्वर ने मुझे बाएं हाथ में कलम और पडित जवाहरलाल नेहरू ने मेरे दाहिने हाथ में शहीदों के खून से रंगा तिरंगा थमाया, मैं दोनो की गरिमा पर दाग नहीं लगने दूंगा । ‘‘
श्री बालकबि बैरागी ने देष के साथ-साथ समाज की भी सेवा की है कई सामाजिक संगठनों में महत्वपूर्ण पदों पर रह कर समाज की सेवा की है ऐसे देवरूपी इन्सान को सत् सत् नमन है सम्पूर्ण वैष्णव समाज एवं वैष्णव वेबसाईट परिवार श्री बालकवि बैरागी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते है । 

Nimach (M.P)
09425106136

Contact For Address

N.D.Nimbawat, Gaurav Nimbawat
"SHREERAM"
106 Shivnath Nagar Suthala, Jodhpur (Raj.)

Contact For Online

Website :- www.vaishnav-samaj.org
E-mail :- Vaishnavwebsite@vaishnav-samaj.org
gauravnimbawat@vaishnav-samaj.org

Contact For Calls

+ 91 9314713779
+ 91 9829098564
+ 91 9252061380

Developed by: M3microtech
All Rights Reserved © 2011 vaishnav-samaj.org