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| वैष्णव ब्राह्मण समाज, जोधपुर का संगठनात्मक इतिहास बहुत पुराना है आजादी से पूर्व से लेकर आज तक वैष्णव समाज, जोधपुर ने सम्पूर्ण भारत वर्ष में संगठन को लेकर एक प्रतिष्ठित पहचान बनाई है वैष्णव समाज की अनेको रजिस्टर्ड / अनरजिस्टर्ड संस्थाये /न्यास कार्यरत है जिसमें सबसे पुरानी संस्थान श्री चतुः सम्प्रदाय वैष्णव ब्राह्मण समाज, गुलाब सागर, जोधपुर, श्री चतुः सम्प्रदाय वैष्णव (साधु) समाज, गीता भवन के पीछे, जोधपुर, चार सम्प्रदाय वैष्णव समाज छात्रावास भवन, मसूरिया, जोधपुर ठाकुर जी गोरधननाथ जी श्रीमती सिरीया देवी अमरदास श्री वैष्णव ब्राह्मण ट्रष्ट जाटावास, जोधपुर, वैष्णव समाज धांधिया मण्डल ट्रस्ट, श्री राजेन्द्र शिक्षण संस्थान, गुलाब सागर, जोधपुर, श्री वैष्णव ब्राह्मण समाज बर्तन व्यवस्था समिति, जोधपुर, वैष्णव समाज समिति चांदपोल समिति, जोधपुर लोरड़ी पंडित जी मण्डल चार सम्प्रदाय वैष्णव समाज विकास समिति लोरड़ी पंडित जी जोधपुर, श्री चतुः सम्प्रदाय वैष्णव समाज विकास संस्थान, कुडी भगतासनी हाऊसिंग बोर्ड, जोधपुर उपरोक्त सभी संस्थाओं /न्यास में से कुछ तो निष्क्रिय है कुछ का दायरा सीमित है जैसे बर्तन व्यवस्था समिति का केवल बर्तन के रख-रखाव तथा समाज के लिए उपयोग में लेना, वैष्णव छात्रावास केवल छात्रावास के संचालन तक सीमित है। साधू समाज भवन संस्था की, चानना भाकर संस्था की कोई सामाजिक गतिविधियां नहीं है केवल गुलाब सागर संस्था अवष्य वर्ष में एकाद बार आयोजन कर लेती है वो भी कभी स्नेहमिलन, कभी सामुहिक विवाह लेकिन उसका दायरा भी जोधपुर महानगर की क्षैत्रिय सीमा तक ही सीमित है । ऐसे में जोधपुर शहर सहित जोधपुर जिले के एक सशक्त वैष्णव समाज के सामाजिक संगठन की आवष्यकता लम्बे अरसे से महषूस की जा रही थी क्योंकि राजस्थान के प्रमुख दुसरे बड़े शहर के रूप में पहचाना जाने वाला जोधपुर शहर सहित जोधपुर जिले की जोधपुर, फलौदी, बिलाड़ा, लूणी औसियां शेरगढ़ एवं भोपालगढ़ तहसीलों के गावों में निवास कर रहे वैष्णव समाज के लगभग 10 हजार परिवार के लिए जोधपुर मुख्यालय पर जिले स्तर के संगठन की आवष्यकता ने वैष्णव समाज संस्थान को जन्म दिया यद्यपि जोधपुर जिले की इन तहसीलों के गावों के अलग-अलग मण्डल अवष्य बने हुए है लेकिन इन मण्डलों की समाजोत्थान एवं विकास के सम्बन्ध में भूमिका नगण्य ही रही है । जोधपुर जिले के वैष्णव समाज को सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक एवं राजनैतिक मजबूती प्रदान करने के लिए लम्बे विचार-विमर्श के बाद वैष्णव समाज, जोधपुर की आम सभा दिनांक .......................... जिसमें समाज के प्रगतिषील विचार वाले प्रबुद्ध व्यक्तियों ने जिसमें मुख्य अग्रणी........................................................................ उपस्थित थे ने एक स्वर में वैष्णव समाज संस्थान के नाम से जोधपुर शहर सहित जोधपुर जिले की संस्था के गठन का निर्णय लिया एवं दिनांक 28.03.2009 की आम सभा में प्रथम कार्यकारिणी का सर्व सम्मति से गठन कर संस्था का राजस्थान संस्था रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत पंजीयन करवाया गया तत्पश्चात् संस्थान् ने गणेष चतुर्थी दिनांक 23 अग्रस्त 2009 को स्नेह मिलन 2009, दिनांक 13 दिसम्बर 2009 को संस्थान् की आम सभा एवं दिनांक 16 मई 2010 को 17 जोड़ो का सामुहिक विवाह 2010 का सफल आयोजन वैष्णव समाज संस्थान की सम्पूर्ण कार्यकारिणी की मेहनत लगन एवं समाज का संस्थान के प्रति विष्वास एवं सहयोग का ही परिणाम रहा कि संस्थान के सदस्य लगातार बढ़ रहे है एवं जोधपुर महानगर सहित जोधपुर जिले की तमाम तहसीलों एवं उसके गंावों तक संस्थान के सदस्य फैले हुए है । संथान ने अपने दो वर्षो के कार्यकाल में जिस तरह से इस संगठन को सामाजिक रूप से मजबूत बनाया है उसी तरह से अपनी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बनाया है इसका अन्दाजा संस्थान के दो वर्ष के आय-व्यय के विवरण से सहज ही लगाया जा सकता है समाज बन्धओं ने मुझ में जो विष्वास व्यक्त कर मुझे अध्यक्ष के पद का भार जिन उम्मीदों के साथ सौंपा है उसमें मैं कितना खरा उतरा हूँ इस सम्बन्ध में आप ही निर्णय करें । मेरा प्रयास है कि मेरे चार वर्ष के कार्यकाल में से शेष रहे 2 वर्ष के कार्यकाल में इस संस्थान का जिला स्तरीय स्वरूप सभी को नजर आये इसी कड़ी में आज की यह आम सभा स्नेहमिलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया है जिसकी सफलता का श्रेय आप ही को मिलना चाहिये क्योंकि आपके सहयोग से ही इस संस्थान का वास्तविक स्वरूप बना रह सकता है मैं तो सिर्फ आपके विष्वास पर समाजोत्थान की ओर अपने कदम बढ़ा रहा हूँ कि आप मेरे साथ है । आपसे हमेषा इसी प्रकार के सहयोग की अपेक्षा रखूगां । सभी को धन्यवाद सभी का आभार | |
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N.D.Nimbawat,
Gaurav Nimbawat
"SHREERAM"
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Suthala, Jodhpur (Raj.)
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